पटाखे-आतिशबाजी चलाने पर होगी कार्यवाही-जिला कलस्टर (मुकेश शर्मा) वाले ध्वनि प्रदूषण के संबंध में अतिशबाजी, पटाखे चलाये जाते जयपुर। जिला कलक्टर श्री माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 18 हैं। इससे न केवल ध्वनि प्रदूषण जगरूप सिंह यादव ने आदेश जारी जुलाई 2015 को पारित निर्णय में होता है बल्कि वायु प्रदूषण की कर निर्देश दिए हैं कि जिले में रात्रि पटाखों द्वारा तथा अन्य माध्यमों से अत्यधिक मात्रा मे बढ़ जाता है10 बजे से प्रातः 6 बजे तक पटाखों उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण के आतिशबाजी के कारण मनुष्यों एवं का उपयोग नहीं किया जाए। संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर विपरित प्रतिबंधित समय एवं शांत परिक्षेत्र प्रदान किये गए है। इनके अनुसार प्रभाव तथा साथ ही बीमार व स्थलों पर पटाखों का उपयोग रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक अस्थमा पीड़ित व्यक्तियों को वर्जित है। इसके अतिरिक्त अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले पटाखों का अत्यधिक कठिनाई का सामना स्थलों पर विभिन्न सामाजिक एवं उपयोग प्रतिबंधित है। पर्यावरण एवं करना पड़ता हैविद्यार्थियों एवं सांस्कृतिक अवसरों पर सामूहिक वन मंत्रालय द्वारा भी 11 जनवरी प्रतियोगी परीक्षार्थियों को पढ़ाई भी रूप से सार्वजनिक स्थानों पर 2010 को अधिसूचना कर ध्वनि इस कारण कुप्रभावित होती है। अत्यधिक प्रदूषक एवं ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) जिला कलक्टर श्री यादव ने विस्तारक आतिशबाजी के लिए (संशोधन नियम 2010 के नियम सभी नागरिकों से निवेदन किया है संबंधित स्थानीय निकाय की 5 क (2) में ध्वनि उत्सर्जित करने कि निर्धारित प्रावधानों को देखते अनापत्ति एवं संबंधित उपखण्ड वाले पटाखें शांत परिक्षेत्र या रात्रि हुए ध्वनि एवं वायु प्रदूषण फैलाने मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस उपायुक्त की समय में नही चलाने का प्रावधान वाले पटाखों एवं अतिशबाजी का पूर्वानमति जरूरी होगी। यदि कोई है। श्री यादव ने बताया कि प्रायः विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक आयोजक या व्यक्ति बगैर अनुमति यह देखने में आता है कि विभिन्न अवसरों पर प्रयोग करने से बचें के इस आदेश का उल्लंघन करता त्यौहारों पर व अन्य सामाजिक- एवं अत्यधिक आवश्यकता होने पर पाया गया तो उसके खिलाफ सांस्कृतिक समारोह आदि के उत्तरदायित्वपूर्ण न्यूनतम ग्रीन कार्यवाही की जाएगीआदेशानुसार अवसर पर भारी मात्रा में अत्यधिक पटाखों का ही आतिशबाजी के पटाखे एवं आतिशबाजी से होने प्रदूषण कारक एवं ध्वनियुक्त लिए उपयोग करें। देश की आर्थिक सुस्ती के दौर को स्वीकारे बिना सरकार के लिए इसका समाधान निकालना कठिन है को दरकि , क्योंकि इतने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बाद की। इससे इन्कार नहीं कि पिछले हैं। कृषि क्षेत्र में सुधार लाए बिना विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष के एक माह में वित्त मंत्रालय और साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती देना लिए भारत की विकास दर का ही रिजर्व बैंक की ओर से मंदी के कठिन है। विश्व बैंक के अनुसार अनुमान जिस तरह घटाया उस पर माहौल को दूर करने के लिए कई आर्थिक सुस्ती का मूल कारण हैरत नहीं। बीते कुछ समय से एक कदम उठाए गए हैं, लेकिन उनके घरेलू मांग में कमी है। कृषि की के बाद एक संस्थाएं यही बता रही सकारात्मक नतीजे आने में समय हालत सुधार कर मांग की इस कमी हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था सुस्ती लग सकता है। यह को दूर किया जा सकता है। में जकड़ रही है। चंद दिनों पहले स्वाभाविक है, क्योंकि चूंकि रोजगार के नए अवसर भारतीय रिजर्व बैंक ने भी विकास इतने बड़े देश की भी मांग की कमी दूर करने दर का अनुमान 6.8 प्रतिशत से अर्थव्यवस्था का पहिया में सहायक बनेंगे इसलिए घटाकर 6.1 प्रतिशत कर दिया है। तेजी से घूमने में समय सरकार को बेरोजगारी दूर इन स्थितियों में अर्थव्यवस्था की तो लगेगा ही। वक्त की करने के उपायों पर भी विशेष सुस्ती को नकारने का कोई मतलब मांग यही है कि सरकार यह ध्यान देना होगा सरकार को इसके नहीं। ध्यान रहे कि किसी भी समस्या सुनिश्चित करे कि उसकी ओर से प्रति भी सक्रिय होना चाहिए कि का सही तरह सामना तभी किया अर्थव्यवस्था को गति देने के जो आर्थिक सुस्ती की अवधि कम से जा सकता है जब उसकी मौजूदगी उपाय किए जा रहे हैं वे प्रभावी कम हो। हालांकि विश्व बैंक का को स्वीकार किया जाए। साबित हों। उसे यह भी आकलन यह आकलन राहतकारी है कि ___ आखिर आर्थिक सुस्ती को करना चाहिए कि और उपायों की अगले वित्त वर्ष में भारत की नकारने वाले इसकी अनदेखी कैसे आवश्यकता तो नहीं है? उसे अर्थव्यवस्था तेजी पकड़ेगी और वह कर सकते हैं कि एक के बाद एक कारोबार जगत र्की चता करने के 6.9 और फिर उसके अगले वर्ष आंकड़े यही गवाही दे रहे हैं कि साथ ही यह भी देखना चाहिए कि 7.2 फीसद तक पहुंच जाएगी, आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ कृषि क्षेत्र की हालत कैसे सुधरे? लेकिन सरकार को वे सभी उपाय गई है, बात चाहे जीएसटी संग्रह में यह ठीक नहीं कि कृषि क्षेत्र में तो करने ही होंगे जो मौजूदा माहौल लगातार कमी की हो या फिर सुधार के तमाम उपायों के बावजूद को बेहतर बनाने का काम करें। विभिन्न क्षेत्रों में आ रही गिरावट स्थितियां बदलती हुई नहीं दिख रही -बृजेन्द्र सिंह मोहनवाड़ी
प्रतिबन्धित क्षेत्रों एवं बिना पूर्वानुमति सार्वजनिक स्थल पर पटाखे-आतिशबाजी चलाने पर होगी कार्यवाही-जिला कलस्टर(मुकेश शर्मा) वाले ध्वनि प्रदूषण के संबंध में अतिशबाजी, पटाखे चलाये जाते जयपुर। जिला कलक्टर श्री माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 18 हैं। इससे न केवल ध्वनि प्रदूषण जगरूप सिंह यादव ने आदेश जारी जुलाई 2015 को पारित निर्णय में होता है बल्कि वायु प्रदूषण की कर निर्देश दिए हैं कि जिले में रात्रि पटाखों द्वारा तथा अन्य माध्यमों से अत्यधिक मात्रा मे बढ़ जाता है10 बजे से प्रातः 6 बजे तक पटाखों उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण के नियंत्रण के आतिशबाजी के कारण मनुष्यों एवं का उपयोग नहीं किया जाए। संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर विपरित प्रतिबंधित समय एवं शांत परिक्षेत्र प्रदान किये गए है। इनके अनुसार प्रभाव तथा साथ ही बीमार व स्थलों पर पटाखों का उपयोग रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक अस्थमा पीड़ित व्यक्तियों को वर्जित है। इसके अतिरिक्त अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले पटाखों का अत्यधिक कठिनाई का सामना स्थलों पर विभिन्न सामाजिक एवं उपयोग प्रतिबंधित है। पर्यावरण एवं करना पड़ता हैविद्यार्थियों एवं सांस्कृतिक अवसरों पर सामूहिक वन मंत्रालय द्वारा भी 11 जनवरी प्रतियोगी परीक्षार्थियों को पढ़ाई भी रूप से सार्वजनिक स्थानों पर 2010 को अधिसूचना कर ध्वनि इस कारण कुप्रभावित होती है। अत्यधिक प्रदूषक एवं ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) जिला कलक्टर श्री यादव ने विस्तारक आतिशबाजी के लिए (संशोधन नियम 2010 के नियम सभी नागरिकों से निवेदन किया है संबंधित स्थानीय निकाय की 5 क (2) में ध्वनि उत्सर्जित करने कि निर्धारित प्रावधानों को देखते अनापत्ति एवं संबंधित उपखण्ड वाले पटाखें शांत परिक्षेत्र या रात्रि हुए ध्वनि एवं वायु प्रदूषण फैलाने मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस उपायुक्त की समय में नही चलाने का प्रावधान वाले पटाखों एवं अतिशबाजी का पूर्वानमति जरूरी होगी। यदि कोई है। श्री यादव ने बताया कि प्रायः विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक आयोजक या व्यक्ति बगैर अनुमति यह देखने में आता है कि विभिन्न अवसरों पर प्रयोग करने से बचें